सुप्रीम लीडर ने पवित्र महीने रमज़ान की शुरुआत के अवसर पर वीडियो कान्फ्रेन्स के माध्यम से आयोजित होने वाले तिलावते क़ुरआन के कार्यक्रम में कहा कि दुनिया में जो लोग नेक कामों की कोशिश में रहते हैं ईश्वर उन्हें ज़िंदगी के असली लक्ष्य तक पहुंचाता है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने क़ुरआन में दौलतमंद व्यक्ति क़ारून की घटना का हवाला देते हुए कहा कि दौलत इंसान का भाग्य भी संवार सकती है क्योंकि इंसान दौलत से दुनिया को आबाद कर सकता है लेकिन इसका रास्ता यह है कि इंसान अपना पैसा ईश्वर के मार्ग में ख़र्च करे।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई का कहना था कि क़ुरआन की कुछ आयतें सामाजिक संबंधों की स्थापना के बारे में हैं। अगर इंसान किसी का विरोध कर रहा है तो किसी मामले यदि वह व्यक्ति हक़ पर है तो उचित नहीं है कि हक़ को छिपाया जाए। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा कि यदि समाज में इन आयतों का प्रचार किया जाए तो बहुत सी समस्याओं से मुक्ति हासिल की जा सकती है।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता का कहना था कि अत्याचारियों की ओर झुकाव और उन पर भरोसे से परहेज़ करना, जीवन में इंसाफ़ का ख़याल रखना और अमानत रखी हुई चीज़ के बारे में विश्वासघात न करना इस्लाम के कुछ अन्य महत्वपूर्ण निर्देश हैं। उन्होंने कहा कि दुशमन से न डरना बल्कि उसके मुक़ाबले में बहादुरी से डट जाना क़ुरआन का महत्वपूर्ण आदेश है जबकि कुछ इस्लामी सरकारों की आज की यह हालत और अत्याचारी ताक़तों द्वारा उनका अपमान इस्लाम के दुशमनों से इन सरकारों के ख़ौफ़ का नतीजा है।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने बड़ी ताक़तों से न डरने की इमाम ख़ुमैनी की महत्वपूर्ण सीख का हवाला देते हुए कहा कि अमरीका से डरने का बड़ा कड़वा नतीजा होता है, हमने ख़ुद अपने यहां कुछ सरकारों में देखा कि अमरीका के डर ने उन्हें कैसी कठिनाइयों में डाल दिया।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई का कहना था कि ईश्वर की ओर ध्यान केन्द्रित करके और ईश्वर की ख़ातिर नमाज़ क़ायम करना, ईश्वर से गुनाहों की क्षमा मांगना विशेष रूप से इन दिनों में जो रमज़ान के दिन हैं, आत्मा के उत्थान का मार्ग है।
इस कार्यक्रम में कुछ क़ारियों ने क़ुरआन की तिलावत की और मुनाजात भी पढ़ी गई।